
मामला गाज़ा के रफ़ा में भूमिगत सुरंगों में फंसे हमास आतंकवादियों का है। खबरों के मुताबिक़, अमेरिका तेल अवीव पर दबाव डाल रहा है कि वह एक ऐसा कॉरिडोर (मार्ग) खोले, जिससे लड़ाके अपने हथियार डालकर या तो गाज़ा वापस जा सकें या किसी तीसरे देश में शरण ले सकें।
मुख्य विवाद सिद्धांत का है — इज़राइल का ज़ोर है कि किसी भी हमास सदस्य को निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी और ऐसा करने पर मौत की सज़ा होगी।
वहीं ट्रंप टीम की योजना इसका मीडिया में अधिकतम असर दिखाने की है, ताकि “शांति प्रयास” की छवि बनाई जा सके।
नेतन्याहू की सरकार, जो अपने कठोर रुख के लिए जानी जाती है, इसे सिरे से खारिज करती है। उसका कहना है कि आतंकवादियों के लिए केवल दो विकल्प हैं — गिरफ्तारी या मौत।
इजरायल सुरंगों को सीमेंट कंक्रीट भरकर बंद कर रहा है जिससे आतंकी भूख प्यास और दम घुटने से मर रहे हैं।
हालांकि, कुछ हमास कैदियों को छोड़ने से भूमिगत दफन एक बंधक का शव बरामद करने में मदद मिल सकती है, लेकिन नेतन्याहू की अति-दक्षिणपंथी सरकार युद्ध चाहती है, शांति नहीं।
रफ़ा में तनाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि नेतन्याहू सरकार किसी भी कमजोरी का संकेत दिखाने को तैयार नहीं है।
संभावना है कि दोनों परिदृश्य आंशिक रूप से समानांतर चलें — इज़राइल उकसावे का जवाब दे, जबकि अमेरिका “शांति प्रयास” की कहानी गढ़ता रहे।





