ऐतिहासिक नौचंदी मेले का उद्घाटन।

मेरठ का नौचंदी मेला अपना एक खास महत्व रखता है। ये मेला सिर्फ न केवल मनोरंजन का साधन है बल्कि ये मेला एकता की भी मिसाल है। परम्परागत विधि अनुसार इस मेले का रविवार देर शाम उद्घाटन करते हुए इस मेले की तैयारी भी युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गयी है। देशभर से इस मेले में दुकाने लगाने के लिए व्यापारी भी आने शुरू हो गये हैं।

नौचंदी मेला लगभग एक महीने तक चलता है और इस मेले को राजकीय मेले का दर्जा प्राप्त है। इसका आयोजन एक वर्ष नगर निगम और अगले वर्ष जिला पंचायत की ओर से किया जाता है। परंपरा के अनुसार होली के बाद दूसरे रविवार को इसका उद्घाटन होता है। ये मेला चैत्र नवरात्रि में मां चंडी की पूजा से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी विवाह से पहले इसी चंडी मंदिर में पूजा करने आती थी।

नौचंदी मेले में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से व्यापारी अपनी दुकानें लगाते हैं। यहां लखनऊ का चिकनकारी काम, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन, वाराणसी की साड़ियां, आगरा के जूते, सहारनपुर की लकड़ी की कारीगरी और मेरठ की प्रसिद्ध कैंचियां मिलती हैं। मेले में झूले, सर्कस और मौत का कुआं जैसे रोमांचक मनोरंजन भी आकर्षण का केंद्र होते हैं। वहीं पटेल मंडप में करीब 20 दिनों तक देशभक्ति, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

उद्घाटन समारोह में आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, एसएसपी अविनाश पांडेय, जलशक्ति मंत्री दिनेश खटीक और जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। सबसे पहले गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना कि । इसके बाद तिरंगे रंग के गुब्बारे और सफेद कबूतर आसमान में छोड़े गए।

बैंडबाजों की धुन के साथ अधिकारी और जनप्रतिनिधि मां चंडी मंदिर पहुंचे जहां पूजा अर्चना कर देवी को चुनरी और नारियल अर्पित किया। इसके बाद बालेमियां की मजार पर चादरपोशी की जो इस मेले की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।