दवाई की आड़ में मौत का व्यापार – शुभम जायसवाल।

आज हम आपको एक ऐसे ‘सफेदपोश’ अपराधी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने दवाई की आड़ में मौत का व्यापार किया। एक ऐसा लड़का जो वाराणसी की तंग गलियों से निकला और देखते ही देखते 2000 करोड़ के नशे के साम्राज्य का मालिक बन गया।
​उसका नाम है— शुभम जायसवाल।
​दवा की शीशी में ‘नशा’ और दिमाग में ‘मुनाफा’… आज देखिए कोडीन किंग शुभम जायसवाल की पूरी कुंडली— ‘जन्म से लेकर भगोड़े होने तक’।”

“कहानी की शुरुआत होती है उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से। यहां के प्रह्लादघात इलाके में ‘भोला प्रसाद’ नाम के एक व्यक्ति की दवा की छोटी सी दुकान थी। शुभम जायसवाल उसी भोला प्रसाद का बेटा है।
​बचपन सामान्य था, परिवार मध्यमवर्गीय। पिता दवा का व्यापार करते थे, लेकिन शुभम की आंखों में सपने बड़े थे—और रास्ते बेहद खतरनाक। उसने पिता के दवा के धंधे को समझा, लेकिन उसका इस्तेमाल लोगों को ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें नशे का गुलाम बनाने के लिए करने की ठानी।”

“असली खेल शुरू हुआ साल 2020 में, जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही थी। यही वो वक्त था जब शुभम जायसवाल ने अपने ‘काले मंसूबों’ की नींव रखी। उसने देखा कि कोडीन युक्त कफ सिरप की मांग नशे के तौर पर बहुत ज्यादा है, खासकर बिहार, बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डर इलाकों में।
​पुलिस की फाइलों के मुताबिक, शुभम ने फर्जी पते पर कई कंपनियां बनाईं। ‘शैली ट्रेडर्स’ और अन्य नामों से उसने हिमाचल और उत्तराखंड से भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप मंगाना शुरू किया।”

“मात्र 5 साल… जी हां, सिर्फ 5 साल के अंदर शुभम जायसवाल एक छोटे से दुकानदार से ‘सुपर स्टॉकिस्ट’ बन गया। उसने ऐसा नेटवर्क बनाया कि हिमाचल से चला ट्रक, यूपी-बिहार होते हुए सीधे बांग्लादेश बॉर्डर तक नशा पहुँचाने लगा। इस धंधे से उसने अकूत संपत्ति जमा की—वाराणसी में आलीशान मकान, लग्जरी गाड़ियां और रसूखदार लोगों के साथ उठना-बैठना।”

“लेकिन कहते हैं न, जुर्म की उम्र लंबी नहीं होती। शुभम जायसवाल के पाप का घड़ा तब भर गया जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और यूपी पुलिस की एसटीएफ (STF) ने उसके सिंडिकेट पर नजर टेढ़ी की।”

“हाल ही में गाजियाबाद, जौनपुर और वाराणसी में हुई बड़ी छापेमारी ने सबको चौंका दिया। जांच में सामने आया कि शुभम जायसवाल ने फर्जी ई-वे बिल के जरिए 500 से ज्यादा ट्रकों में भरकर नशीला कफ सिरप सप्लाई किया था। इसकी कीमत 100-200 करोड़ नहीं, बल्कि पूरे 2000 करोड़ रुपये आंकी गई है!
​जांच एजेंसियों को पता चला कि शुभम ने इस काले धंधे में अपने पिता, चाचा और चचेरे भाइयों को भी शामिल कर लिया था। यह पूरा ‘फैमिली बिजनेस’ बन चुका था।”

“अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर नशे का यह सौदागर अब कहां है?
​सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की भनक लगते ही शुभम जायसवाल देश छोड़कर भाग चुका है। उसकी लोकेशन दुबई बताई जा रही है। यूपी पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है और उसकी संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी चल रही है। उसके कई साथी और रिश्तेदार अब सलाखों के पीछे हैं, लेकिन मास्टरमाइंड अभी भी पुलिस की पहुंच से दूर है।”

“एक मामूली दवा व्यापारी का बेटा, जो रातों-रात अरबपति बनने की चाह में हजारों युवाओं की जिंदगी बर्बाद करने वाला ‘ड्रग लॉर्ड’ बन गया। शुभम जायसवाल की कहानी हमें बताती है कि शॉर्टकट से कमाई गई दौलत का अंजाम हमेशा बुरा होता है।
​पुलिस का दावा है कि जल्द ही शुभम जायसवाल कानून की गिरफ्त में होगा और उसे भारत लाया जाएगा।