इटावा—अयोध्या रामलला मंदिर पर धर्म ध्वज फहराने के मुद्दे पर सांसद जितेंद्र दोहरे का बयान, प्रधानमंत्री पर लगाया राजनीतिक प्रचार का आरोप
अयोध्या में रामलला मंदिर पर देश के प्रधानमंत्री द्वारा धर्म ध्वज फहराने की घोषणा को लेकर इटावा सांसद जितेंद्र दोहरे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सांसद ने कहा कि यह पहली बार सुनने में आ रहा है कि किसी प्रधानमंत्री द्वारा किसी मंदिर में जाकर धर्म ध्वज फहराया जाएगा। उन्होंने इस कदम को परंपरागत धार्मिक व्यवस्था के विपरीत बताया।
जितेंद्र दोहरे ने कहा कि मंदिरों में धर्म ध्वज लगाने का कार्य सामान्यतः शंकराचार्यों, साधु-संतों एवं धार्मिक परंपराओं से जुड़े व्यक्तियों द्वारा किया जाता है, न कि राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा। उनका कहना है कि देश का प्रधानमंत्री जब मंदिर में जाकर ध्वज फहराता है, तो यह धार्मिक क्रिया से अधिक राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होता है।
सांसद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री इस मौके का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी के प्रचार के लिए कर रहे हैं, न कि किसी धार्मिक परंपरा के निर्वहन के लिए। उन्होंने कहा कि धर्म ध्वजा परंपरा का विषय है, और इसे धार्मिक आस्था के प्रतिनिधियों द्वारा ही फहराया जाना उचित है।
जितेंद्र दोहरे ने यह भी कहा कि मंदिर पर फहराई जा रही ध्वजा वास्तव में आरएसएस और भाजपा से जुड़ी प्रतीकात्मक ध्वजा है, जिसे मंदिर की परंपरा और मर्यादा के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों को राजनीति से दूर रहना चाहिए और धार्मिक परंपराओं का पालन धार्मिक आचार्यों द्वारा ही होना चाहिए।
सांसद के इस बयान ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। भाजपा समर्थक और विपक्षी कार्यकर्ताओं के बीच इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है। हालांकि, भाजपा की ओर से इस बयान पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह प्रकरण अयोध्या के रामलला मंदिर में होने वाले कार्यक्रमों और उनकी राजनीतिक व्याख्या को लेकर जारी बहस को एक बार फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।





