राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान में अब मोतियाबिंद का निःशुल्क ऑपरेशन

राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (JIMS) ने प्रदेशवासियों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। अब संस्थान में मोतियाबिंद का ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क होगा। इस कदम से विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग के मरीजों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि निजी अस्पतालों में मोतियाबिंद की सर्जरी काफी महंगी होती है।

भारत में अंधेपन का सबसे बड़ा कारण मोतियाबिंद है, और देश में लगभग 66.2% अंधेपन के मामलों के लिए अकेले यही जिम्मेदार है। अध्ययनों के अनुसार भारत में मोतियाबिंद का कुल प्रसार 14.85% है। 75 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में इसके होने की संभावना सामान्य आयु वर्ग की तुलना में लगभग 11 गुना अधिक पाई गई है। सामाजिक-आर्थिक स्तर भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है—सबसे गरीब वर्ग के लोग इसका ज्यादा शिकार होते हैं, जबकि शिक्षा का स्तर बढ़ने पर जोखिम कम होता है।

उत्तर प्रदेश में भी स्थिति चिंताजनक है। राज्य में 50 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 20–25 लाख लोग मोतियाबिंद से प्रभावित हैं। ऐसे में जिम्स द्वारा निःशुल्क इलाज शुरू किया जाना एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। इस सुविधा के अंतर्गत दवाएँ, जाँचें और सर्जरी—सभी पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होंगी।

संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी गुणवत्तापूर्ण इलाज प्राप्त कर सकें।

मोतियाबिंद के प्रमुख लक्षणों में धुंधलापन, रात में दिखने में परेशानी, तेज रोशनी से संवेदनशीलता, रोशनी के चारों ओर छल्ले दिखना, रंगों का फीका पड़ना, दोहरी दृष्टि और चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव शामिल हैं। जब चश्मा या लेंस से फायदा न हो, तो सर्जरी ही एकमात्र प्रभावी उपाय बचता है।

जिम्स में निःशुल्क मोतियाबिंद उपचार शुरू होने से हजारों मरीजों को न सिर्फ राहत मिलेगी, बल्कि समय पर इलाज मिलने से उनकी जीवन गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इससे संस्थान में मरीजों की संख्या में वृद्धि होना भी तय है।