
देवभूमि उत्तराखंड आज अपना स्थापना दिवस बड़ी श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मना रहा है। 9 नवंबर 2000 का वह ऐतिहासिक दिन जब लंबे संघर्ष, हजारों आंदोलनकारियों के अथक प्रयासों और असंख्य बलिदानों की बदौलत देश के नक्शे पर 27वें राज्य के रूप में उत्तराखंड का जन्म हुआ। वर्ष 2025 में राज्य अपनी 25वीं वर्षगांठ—रजत जयंती—मना रहा है, जिसे लेकर पूरे प्रदेश में उत्सव जैसा माहौल है।
सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं द्वारा पूरे उत्तराखंडी समाज को हार्दिक बधाइयां और शुभकामनाएं दी जा रही हैं। राज्यभर में रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सम्मान समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। पर्वतीय संस्कृति की झलक दिखाते पारंपरिक लोकगीत, वाद्य और नृत्य कार्यक्रम लोगों को अपने गौरवशाली इतिहास की याद दिला रहे हैं।
इस मौके पर राज्य निर्माण आंदोलन के शहीदों को विशेष रूप से स्मरण किया जा रहा है। उन अमर वीरों, माताओं-बहनों और आंदोलनकारियों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया जा रहा है जिन्होंने उत्तराखंड राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपने जीवन तक का बलिदान दे दिया। देहरादून, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी, श्रीनगर तथा अन्य ज़िलों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं जहां नई पीढ़ी को राज्य आंदोलन के इतिहास से रूबरू कराया गया।
रजत जयंती वर्ष पर यह संकल्प भी लिया जा रहा है कि हम सभी मिलकर उत्तराखंड को आदर्श, आत्मनिर्भर, विकसित और सशक्त बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पलायन रोकने, शिक्षा-स्वास्थ्य सुधारने, पर्यटन को बढ़ाने और स्थानीय युवाओं को बेहतर अवसर देने जैसे मुद्दों पर भी जन संवाद हो रहा है।
उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति, प्रकृति, वीरता और सरलता है। यही मूल्य राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।





